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Friday, October 3, 2008

कैसे निपटा जाए आतंकवाद से- 01

हिन्दुस्तान में आतंकवादियों के हौसले बुलंद है। सरकारें हीलिंग टच की नीति अपना रही है तो बदले मे आतंकवादी विस्फोट कर रहे हैं। निशाने पे है देश की निर्दोष जनता। आज की तारीख़ में देश का हर कोना निशाने पर आया और दिल को थर्राने वाले हादसे हुए है। ये सब कारनामे जेहाद रुपी इस्लामी आतंकवादियों का हैं। ये जहां-तहां देश के कोने-कोने में अपनी कार्यवाही को अंजाम दे रहे हैं और हमारी सरकारें मूकदर्शक बन कर खड़ी हुई है। आतंकवाद के मूल मे इस्लामी चरमपंथ है जो विश्व के अन्य हिस्सों में भी काल का दूसरा नाम बन गया है।



सरकार राजनीतिक सत्यता के चक्कर में आतंकवादियों के प्रति हमदर्दी का रुख़ अपनाकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रही हैं। हाल के दिनों में दो घटना मुस्लिम तुष्टिकरण की तरफ ध्यान आकर्षित करती है, जो की आतंकवाद का मूल कारण हैं। पहला अमरनाथ संघर्ष में तिरंगा का अपमान। श्रीनगर में यों जलाया गया था तिरंगा....
क्या यह संसार के किसी देश में सम्भव था.....???

इस राष्ट्रीय अपमान का क्या करेंगे.........???

क्या इसे देश के खिलाफ युद्ध नहीं माना जाये..............???

दूसरी, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति मुशीरुल हसन, शिक्षक और छात्र खुलकर आतंकवादियों की कानूनी और वैचारिक समर्थन में आगे आ गए। मानव संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह हसन के उस बयान का समर्थन किया जिसमें उन्होंने जामिया के छात्रों को कानूनी मदद देने का ऐलान किया था। दरअसल कांग्रेस पार्टी आतंकवाद से कड़ाई से निपटने के नाम पर मुस्लिम वोट बैंक को नाराज नहीं करना चाहती।
हम आतंकवाद से निपटने में नाकाम रहे हैं। कई सरकारें आईं और गईं। लेकिन आतंकवाद रोज़ सुरसा की तरह मुंह फैलाए जा रहा है. आतंकवाद के मूल मे इस्लामी चरमपंथ है जो विश्व के अन्य हिस्सों में भी काल का दूसरा नाम बन गया है।
कैसे निपटा जाए इस आतंकवाद से, यह सवाल अहम है. उससे भी ज़्यादा अहम है आतंकवाद का मूल क्या है? क्यों दुनिया के कुछ देशों में चल रहे विवादों को अन्य देश भुगत रहे हैं? क्या ये सभ्यताओं का संघर्ष है? क्या हम राजनीतिक सत्यता के चक्कर में आतंकवादियों के प्रति हमदर्दी का रुख़ अपनाकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं? आख़िर कैसे निपटा जाए इस इस्लामी आतंकवाद से?

.......जारी।

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