* लोकतंत्र के महापर्व में वाक्-चलीसा * आखिर क्यों फ़ेंका जरनैल सिंह ने जूता ? * लोकतंत्र का महापर्व और "कुछ ख्वाहिश" * "कश्मीरी पंडित" होने का दर्द * राजनेताओं हो जाओ सावधान, जाग रहा हैं हिंदुस्तान * जागो! क्योंकि देश मौत की नींद सो रहा हैं। * आखिर यह तांडव कब तक? * पाकिस्तानियों में अमेरिकी नीति का खौफ * खामोशी से क्रिकेट को अलविदा कह गया दादा * कैसे निपटा जाए आतंकवाद से- 01 * कैसे निपटा जाए आतंकवाद से- 02 * कैसे निपटा जाए आतंकवाद से- 03 * कैसे निपटा जाए आतंकवाद से- 04 * क्या इसे आतंकवाद न माना जाये ? * कही कश्मीर नहीं बन जाये "असम" * जेहाद या आतंकवाद का फसाद * बेबस हिन्दुस्तान, जनता परेशान, बेखबर हुक्मरान * ‘आतंकवाद की नर्सरी’ बनता आजमगढ़ * आतंकवाद का नया रूप * आतंकवाद और राजनीति *

Sunday, July 27, 2008

आतंकवाद और राजनीति

26 जुलाई 2008, स्थान- गुजरात का अहमदाबाद शहर. 17 श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोटों में कम से कम अठारह व्यक्तियों की मौत, और 100 लोग घायल.

25 जुलाई 2008, स्थान- सूचना प्रौद्योगिक शहर बेंगलुरु. एक घंटे के भीतर हुए आठ विस्फोटों से एक महिला की मौत हो गई थी, जबकि सात लोग घायल हो गए.

आने वाली सुबह पता नही किसके घर के चिराग अपने साथ बुझा ले जायेगी??



अहमदाबाद धमाकों के सुराग माननीय केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल जी के पास हैं, लेकिन देशहित में वे इसे सार्वजनिक नहीं करेंगे. कोई उनसे पुछे आखिर किस देशहित की बात वह कर रहे हैं????



जिस लगन और मेहनत से हमारे राजनीतक आका सरकार गिराने और बचाने की कवायद करते हैं, काश उसकी आधी मेहनत भी देश की सुरक्षा के लिए किया होता. तो आतंकवाद का यह नंगा नाच न होता. आतंकी लगातार अपने मंसूबों में कामयाब न होते.




राजनीतिक रुप से विफल इस देश का सफल नागरिक आतंकवाद की वेदी पे अपनी बली दे रहा हैं. दुनिया को लोकतंत्र का पाठ पढाने वाला यह देश, आज अपने नागरिको को सुरक्षा नही दे पा रहा. हर बार विशेष जाँच दल बनता है, जाँच चलती है, न्यायालय में केस चलता है और धीरे धीरे फिर भूल जाते हैं.



सोचिए, 9/11 के बाद अमरीका में और 7/7 के बाद ब्रिटेन में कोई बडा आतंकवादी हमला नहीं हुआ. यहाँ तक कि स्पेन जैसे देश में मेड्रिड धमाकों के बाद कोई हमला नहीं हुआ. हालत यह होने लगी है कि अब आतंकवादी हमले बाढ, चक्रवात और सुखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं जैसे लगने लगे हैं.



हम भारतीय आतंकवाद के खिलाफ लडाई में हार रहे हैं.दूनिया के समक्ष देश की छवि एक कमजोर राष्ट्र की बन रही है. देश के निति निर्धारकों मे ईच्छाशक्ति की कमी है. हम हद से अधिक उदासीन और सहिष्णु हो गए हैं.




हमारा देश सचमुच में एक कमजोर देश हैं. हमारा देश राजनीतिक रुप से एक विफल देश साबित हो रहा हैं, और हम इस देश के सफल नागरिक.

3 comments:

Anonymous said...
This comment has been removed by a blog administrator.
Anil Kumar said...

सही कही। हमारे देश को अब ये राजनेता दिन दूना रात चौगुना खोखला कर रहे हैं। देश की खाल उधेड़कर अपने लिये सूट-पैंट बनवा रहे हैं ये साले। एक नज़र यहां भी देखें।

राज भाटिय़ा said...

आतंकवाद यह कुत्ते नेता ही फ़ेलाते हे, वरना इन का कोई अपना क्यो नही मरता ?
धन्यवाद

Post a Comment

खबरनामा को आपकी टिप्पणी की जरुरत हैं! कृप्या हमारा मार्गदर्शन करे! आपको टिप्पणी करने के लिए तहे दिल से अग्रिम धन्यवाद!!!

 

हिन्दी ब्लॉग टिप्सः तीन कॉलम वाली टेम्पलेट