* लोकतंत्र के महापर्व में वाक्-चलीसा * आखिर क्यों फ़ेंका जरनैल सिंह ने जूता ? * लोकतंत्र का महापर्व और "कुछ ख्वाहिश" * "कश्मीरी पंडित" होने का दर्द * राजनेताओं हो जाओ सावधान, जाग रहा हैं हिंदुस्तान * जागो! क्योंकि देश मौत की नींद सो रहा हैं। * आखिर यह तांडव कब तक? * पाकिस्तानियों में अमेरिकी नीति का खौफ * खामोशी से क्रिकेट को अलविदा कह गया दादा * कैसे निपटा जाए आतंकवाद से- 01 * कैसे निपटा जाए आतंकवाद से- 02 * कैसे निपटा जाए आतंकवाद से- 03 * कैसे निपटा जाए आतंकवाद से- 04 * क्या इसे आतंकवाद न माना जाये ? * कही कश्मीर नहीं बन जाये "असम" * जेहाद या आतंकवाद का फसाद * बेबस हिन्दुस्तान, जनता परेशान, बेखबर हुक्मरान * ‘आतंकवाद की नर्सरी’ बनता आजमगढ़ * आतंकवाद का नया रूप * आतंकवाद और राजनीति *
Showing posts with label सपना. Show all posts
Showing posts with label सपना. Show all posts

Tuesday, July 8, 2008

आह, एक सुंदर सपना टुट गया.

भाई साब, बडे बुजुर्ग सही कहते थे- "बेटा सपना मत देख"। वरना दिल टुट जाएगा, लेकिन नही. जवानी का जोश, उफनता हुआ गरम खून, और मैने भी सपना देख लिया। लेकिन है इस से पहले की आप पाठकगण कुछ गलत सोचे, हम ख़ुद ही बताये देते हैं - यह सुंदर सपना था तेरह साल बाद ऐशिया विजेता बनने का।

लेकिन भाई साब अपने लड़के बडे शिष्टाचारी है, बचपन में सिखाई हर बात याद है इनको, तो फिर ये कैसे भुल जाते। लो भाई खेलेंगे ही नही, बडे बुजु्गों का इज््त भी रह जायेगा, और इन निठ़््लो का सपना देखने का आदत सुधरेगा।


और लो भाई साब, धोनी के रणबुंकारे बडे बुजु्गों की मान रखने के लिए मुँह की खा कर वापस आ गई। लेकिन इऩकी शान में कोई गुस्ताकी नही, लङको ने मेहनत बहुत की। घुङसवारी की, जल कीङा् की, पोङोसियो के साथ मस्ती की...........कितने थक गये हैं बेचारे। अब आप क्या चाहते हो, जान दे दे आप के लिए।

और ये सुधरना सुधारना क्या लगा रखा हैं? इसकी जरुरत तो आप को हैं। जब देखो जीत, क्या हैं, कोई काम नही हैं क्या। या और कोइ खेल नही बचा हैं इस देश मे??? जाओ यार, हाकी और पता नही कितने हजार और खेल बचे हैं इस देश में, कभी उनपर भी नजरें इनायत कर दो। नही तो चाईना में भी मेडल नही मिलेगा।
 

हिन्दी ब्लॉग टिप्सः तीन कॉलम वाली टेम्पलेट